Kashmakash jindagi..

        ____कशमकश जिंदगी ____
Kuch yadon ke naye sire kuchh kahani ki na koi aant,
Ye jindgi sirf kuch pane ke liye bahut kuch khona parta hai..
हजारों फेरे लगाए थे हमने उसके घर के ....
कोई किस्मत वाला था जो उसे 
सात फेरों मे ही उठा के ले गया

मेरे पर्स में 
इक बहुत पुरानी तस्वीर हैं,
जिसे जीवन के एकांत क्षणों में
एकटक निहारता हूँ
बड़े गर्व से चूँमकर
वापस पर्स में सुरक्षित रख लेता हूँ!
मेरी  पत्नी के पास भी है,
कुछ ऐसी ही तस्वीर
जिसे वह मायके से मिली साड़ियों की तहों के बीच
छुपा कर रखती है,
मेरी ही तरह शायद वो मेरे से,
डरती है जैसे में डरता हूँ उससे!


मैने उसे कभी-कभी
चुपके से,
कुछ रंगीन कागजों को पढ़ते हुए भी देखा
शायद उसे भी मिलें होंगे प्रेम-पत्र
जिस प्रकार मैने दिए थे,
किसी को!
फर्क सिर्फ इतना है कि में,
उन चीजों को याद कर
 गर्व से मुस्कुराता हूँ
और वह सुबुकती (आंखों में आंसु)
रहती हैं!


जिस प्रकार मुझे लगता है,
मेरे पर्स की तस्वीर के बारे में 
उसे कुछ नहीं पता!
ठीक उसे भी यही लगता होगा कि,
 उस तस्वीर और प्रेम पत्र
 के बारे मुझे कुछ नही पता
जिसे वह मायके वालों से भी छुपा कर
अपने साथ साथ ले आई है,
अपनो साड़ी को तह करके
अंदर छुपा रखी है!

उसके साथ कुछ क्षणों में
उसकी मन और आत्मा के  शिखरों पर
जब मेरा वश रहता है,
तब सोचता हूँ उससे पूछूँ
उन बीते पड़ावों के अनुभवों के बारे में
परन्तु यह सोचते ही
मेरे आत्मा में कसक होने लगता है
कही वो मेरी तरह तो नही,
किसी के वादे और बातो का गुलाम!


एक दिन जब वह
खाना बना रही थी,
मैने साड़ी की तहों से
निकाल ली तस्वीर!
मन का वश नही चल रहा था मेरे ऊपर
और पढ़ लिए प्रेम पत्र!
लड़का कुछ हद तक मुझसे सुंदर था
पत्र साधारण से थे-लाल पिले
जिनमेँ वही दिल की बातें
और कुछ वादे,
जीने मरने की कसमें
और दूर होने की परिस्थितियाँ!
मानो तो प्रेम पत्र नही 
बाल्मीकि का रामायण सा था!
खैर पढ़ लिए समझ लिए,
यहाँ तक कि हालात-ए-मजबूरियां
भी महसूस कर लिए!

फिर मुझे लगा अपने बारे
में इन्हें बताना लाज़मी है,
बहुत दिनों तक मै असमंज था
क्या करूँ क्या न करूँ सोचता रहा
एक दिन जब वह बेहद उदास बैठी थी
उसे अपने पास बुलाया,
पर्स से तस्वीर निकाली उसे दिखाया
और बीते सारे प्रेमानुभवों को बता दिया
मस्तक चूँम कर कहा- 'अब मैं
सिर्फ तुमसे प्यार करता हूँ
लो तस्वीर जो चाहो सो करो!!


उस समय वो कुछ न बोली
कई दिनों तक वह गुमसुम रही,
अपने भीतर सीढ़ियाँ चढ़ती उतरती रही
एक शाम जब मै बेहद उदास था
वह पास आई और पीछे से झुक कर
बिना कुछ कहे चूँम लिया!
मेरी तो सारी उदासी गायब हो गई!
फिर उस लड़के की तस्वीर और पत्रों को दिखाया
मैने कहा
मैने बहुत पहले ही इन्हे देख लिया था!☺


यह सुनते ही सजल आँखो से
वह मुझे टाका टक देखती है
कुछ डरती है
मै चुप रहता हूँ,
तब तक में
एक कप चाय के लिए कहता हूँ!

वह भारी कदमों से रसोई चली जाती 
थोड़ी देर में कुछ जलने की गंध आती,
मैं तेज कदमों से रसोई तक आता हूँ
वह पत्रों एवँ तश्वीरोँ को एक-एक कर
चूल्हे में जला रही
चाय बना रही है!
मैं पीछे से उसके कंधों पर हाथ रखता हूँ
वह मुड़कर मुझसे लिपटने लगती है
चाय उबल कर बहने लगती है---
फिर में गैस स्टोव बंद करता हु--👍👌
#nature lovers
#animals lovers
#human lovers
BY ...PRINCE 




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